कई बार हम कोई निर्णय लेने के बाद भी असमंजस में रहते हैं। हमें लगता है कि कहीं हमारा फैसला गलत तो नहीं है। ऐसी स्थिति में हम बार-बार दूसरों से पूछते हैं कि हमने जो किया या सोचा, क्या वह सही है। दूसरों से आश्वासन मिलने पर कुछ समय के लिए मन शांत हो जाता है, लेकिन थोड़ी देर बाद फिर वही संदेह होने लगता है। मनोविज्ञान में इस व्यवहार को बार-बार आश्वासन मांगने की प्रवृत्ति कहा जाता है।
बार-बार दूसरों से पुष्टि करवाने की आदत क्या है?
जब कोई व्यक्ति अपने विचारों, फैसलों या काम पर भरोसा करने के बजाय बार-बार दूसरों की राय मांगता है, तो इसे आश्वासन मांगने का व्यवहार कहते हैं। उदाहरण के लिए, किसी संदेश को भेजने के बाद बार-बार पूछना कि क्या वह ठीक लिखा था या कोई छोटा निर्णय लेने से पहले कई लोगों से उसकी पुष्टि करवाना। कभी-कभी ऐसा करना सामान्य है, लेकिन इसकी अधिकता परेशानी का कारण बन सकती है।
इसकी जरूरत बार-बार क्यों महसूस होती है?
इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं:
- आत्मविश्वास की कमी: व्यक्ति को अपने फैसलों पर भरोसा नहीं होता और वह दूसरों की राय पर निर्भर रहने लगता है।
- गलती करने का डर: गलत साबित होने या आलोचना का सामना करने का डर बार-बार पुष्टि करवाने के लिए प्रेरित करता है।
- चिंता और अत्यधिक सोचना: छोटी-छोटी बातों को लेकर लगातार सोचने से मन में संदेह बढ़ सकता है।
- दूसरों की स्वीकृति की जरूरत: कुछ लोग चाहते हैं कि दूसरे हमेशा उनकी बातों और फैसलों से सहमत हों।
- नकारात्मक अनुभव: पहले हुई आलोचना, असफलता या असुरक्षा के अनुभव इस आदत को बढ़ा सकते हैं।
इस आदत का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
बार-बार आश्वासन मिलने से चिंता कुछ समय के लिए कम हो सकती है। लेकिन धीरे-धीरे व्यक्ति को अपने फैसले लेने में कठिनाई होने लगती है। वह हर छोटी बात पर दूसरों की स्वीकृति चाहता है। इससे आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है, रिश्तों में तनाव आ सकता है और अत्यधिक सोचने की आदत बढ़ सकती है। इस प्रकार व्यक्ति आश्वासन के लिए दूसरों पर अधिक निर्भर होने लगता है।
इस आदत को कम करने के लिए क्या करें?
इस व्यवहार को कम करने के लिए कुछ छोटे बदलाव मददगार हो सकते हैं:
- अपने छोटे-छोटे फैसले स्वयं लेने का अभ्यास करें।
- हर बात पर दूसरों की राय लेने से बचें।
- यह स्वीकार करना सीखें कि हर निर्णय पूरी तरह सही होना जरूरी नहीं है।
- अपने विचारों और भावनाओं को समझने के लिए समय निकालें।
- बार-बार संदेह होने पर तुरंत आश्वासन मांगने के बजाय कुछ समय प्रतीक्षा करें।
विशेषज्ञ की मदद कब लेनी चाहिए?
यदि बार-बार पुष्टि करवाने की आदत के कारण रोजमर्रा के काम, पढ़ाई, नौकरी या रिश्ते प्रभावित होने लगें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार बेचैनी, नींद में परेशानी और निर्णय लेने में कठिनाई होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
मनोवैज्ञानिक परामर्श और संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा की मदद से व्यक्ति अपने नकारात्मक विचारों को पहचानना, अनिश्चितता स्वीकार करना और आत्मविश्वास बढ़ाना सीख सकता है। आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ उचित उपचार भी सुझा सकते हैं। यदि चिंता लगातार बनी रहती है, तो इंदौर में चिंता विकार का उपचार लेने के लिए योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करना उपयोगी हो सकता है।
FAQs
1. बार-बार दूसरों से अपनी बात की पुष्टि करवाना क्या सामान्य है?
कभी-कभी सलाह लेना सामान्य है, लेकिन हर छोटे फैसले पर आश्वासन की जरूरत महसूस होना परेशानी का संकेत हो सकता है।
2. क्या बार-बार आश्वासन मांगना चिंता का लक्षण हो सकता है?
हां, यह चिंता से जुड़ा व्यवहार हो सकता है। हालांकि, इसके अन्य मनोवैज्ञानिक कारण भी संभव हैं।
3. क्या आत्मविश्वास की कमी के कारण ऐसा व्यवहार होता है?
हां, आत्मविश्वास की कमी के कारण व्यक्ति अपने फैसलों पर संदेह कर सकता है और दूसरों की स्वीकृति चाहता है।
4. बार-बार दूसरों से पुष्टि मांगने की आदत कैसे कम करें?
छोटे फैसले स्वयं लेने, अनिश्चितता स्वीकार करने और अपने विचारों पर भरोसा करने का अभ्यास करें।
5. क्या इस व्यवहार के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श की जरूरत पड़ सकती है?
यदि यह आदत मानसिक शांति और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है, तो मनोवैज्ञानिक परामर्श मददगार हो सकता है।